सर्वे रिपोर्ट : भ्रष्टाचार के मामले में नेता और पुलिस के बीच नम्बर वन होने की जंग

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अखिलेश अखिल की कलम से   

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भ्रष्टाचार को लेकर आजादी के बाद से ही देश की राजनीति गर्म रही है। आजाद भारत के इतिहास को देखा जाए तो साफ़ हो जाता है कि विकास की योजनाओं के साथ ही भ्रष्टाचार  की योजनाएं भी बनती रही है। 70 के दशक से जब राजनीति में गुंडई ,लम्पटई और अपराध का समावेश हुआ तब भ्रष्टाचार को और गति मिलती गयी। अब तक कोई ऐसी सरकार नहीं रही जिस पर भ्रष्टाचार के दाग ना लगे हों। संसद से लेकर सड़क तक और आम आदमी से लेकर मंत्री संत्री तक भ्रष्टाचार के गवाह बनते दिखे। इस भ्रष्टाचार पर ना जाने कितनी बहसें हुई, संसद में सर्कस सरीखे खेल हुए, मारपीट की घटनाएं घटी,लेकिन भ्रष्टाचार हमारे बीच ऐसा समा गया कि अब इसके बिना जीना ही दूभर है।
     अभी भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मसले पर वरिष्ठ पत्रकार मनोहर मनोज ने व्यापक और सघन काम करते हुए जो आंकड़े तैयार किया है उससे साफ़ लगता है कि सामाजिक,आर्थिक और राजनीति क्षेत्र से जुड़े तमाम मानव समुदाय भ्रष्टाचार को या तो स्वीकार कर चुका है या फिर भ्रष्टाचार में जीने को अभिशप्त है ।
    पत्रकार मनोहर मनोज पिछले 15 सालों से भ्रष्टाचार को जड़ से पकड़ने की कोशिश करते रहे हैं। इसी भ्रष्टाचार पर आधारित उनकी पुस्तक ‘ए क्रूसेड अगेंस्ट करप्शन ‘ जल्द ही बाजार में आने वाला  है।  भ्रष्टाचार के मसले पर उनके व्यापक आंकड़ों में से कुछ का जिक्र करना यहां मुनासिव समझते हुए पेश करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि ये आंकड़े कई किश्तों में लिखे जाएंगे —
       मनोहर मनोज के ये आंकड़े उनके सर्वे 1 का हिस्सा है जिसमें उन्होंने आम लोगों से व्यापक स्तर पर बातचीत की है। 73 फीसदी आम जनता यह मानती है कि किसी ना किसी काम के लिए उन्हें घूस देनी पड़ी है। इन्ही लोगों ने यह भी स्वीकार किया है कि आज भी सबसे ज्यादा भ्रष्ट नेता लोग हैं। करीब 13 फीसदी लोगों ने नेता को सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी माना है। भ्रष्टाचार के मामले में नेता के बाद पुलिस दूसरे नंबर पर हैं। 12 फीसदी लोग पुलिस को भ्रष्ट मानते हैं। इसके बाद क्लर्क,डॉक्टर और वकील का नंबर आता है। 6 फीसदी लोगों ने प्रशासनिक अधिकारी को भी भ्रष्ट माना है जबकि 5 फीसदी लोगों ने जज को भ्रष्ट ठहराया है। इसके साथ ही करीब 5 फीसदी लोगों ने मीडिया को भी भ्रष्ट कहा है। भ्रष्टाचार की इस सूचि में टीचर ,ठीकेदार ,इंजीनियर ,कलाकार ,शेयर ब्रोकर ,मजदूर भी शामिल है।
        भ्रष्टाचार से जुड़े इस आंकड़े का एक पहलु ये भी है कि 56 फीसदी लोगों ने जहां घुस  देने वालो को दोषी ठहराया है वही 44 फीसदी लोगों ने इसे जायज माना है। जाहिर है घुस देने वालों को जब कोई ऐतराज नहीं है तो लेने वाले क्यों पीछे हटे ?  84 फीसदी लोगों ने यह स्वीकार किया है कि वैध काम के लिए भी उन्हें घूस देना पड़ा है। लोगों को सबसे ज्यादा घूस पुलिस से सम्बंधित काम के लिए देना पड़ा है।  करीब 16 फीसदी लोग मानते हैं कि पुलिस को घूस दिया है। करीब 15 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया है कि राशन कार्ड के लिए उन्हें घूस देना पड़ा। ड्राइविंग     लाइसेंस के लिए घुस देने वाले 13 फीसदी लोग हैं जबकि बैंक लोन के लिए 11 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने घूस दिया है। इसके अलावा अलग अलग क्षेत्र में भी घूस देने की बात लोगों ने स्वीकार की है।
       क्या आपने वोट देने के लिए रुपये और शराब को स्वीकार किया ? इस सवाल के जबाब में 11 फीसदी लोगों ने हामी भरी है। यानी देश में पैसे और शराब पर करीब 11 फीसदी लोग बिक जाते हैं वोट के समय। 17 फिसदी आम जनता ने यह भी स्वीकार किया है कि वे भी अपने बच्चो को घूस कमाने के लिए प्रेरित करते हैं जबकि 83 फीसदी लोग ऐसा नहीं चाहते। आम जनता में 90 फीसदी लोगों का मानना है कि अगर देश के नेता और अधिकारी ईमानदार हो जाए तो भ्रष्टाचार रुक सकता है।
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