Friday, October 20, 2017

हम हो रहे अपराधी

ड्राईवर,कंडक्टर,खलासी और चपरासी जैसे चेहरे क्यों होते हैं अक्सर दागदार क्यों होते हैं इनसे कथित अपराध क्यों होते हैं ये अक्सर कलंकित रोटी की तलाश में छूटा होगा इनका गांव-गली खेत-खलिहान पिता...

रोहिंग्या के सवालों को इस्लाम और बौद्धों के सवालों में न...

रोहिंग्या मुसलमानों की लाशों की ढेर पर हमारी निगाहें टिकी हुई हैं। बौद्ध और मुसलमान आपस में अपने-अपने सवालों को लेकर संघर्षरत हैं। लाखों...

खनकती कंगना के मायने

बाबा विजयेंद्र की कलम से ------------------- कंगना खनक रही है। कंगना की आवाज खाए पीये अघाए लोगों को झंकृत कर रही है। यौन-मुक्ति की आवाज को मुखरित...

हे राम ! अफ़सोस है इस लंकेश का मारा जाना

                                               ...

राघव दास अस्पताल और राम रहीम का आश्रम

            सरकार के सामाजिक सरोकार समाप्त हो चुके हैं। सरकार केवल एक सूचना भर है।  बुनियादी सवालों से पूरी व्यवस्था बेखबर हो चुकी है।  चारो...

वोट का सच्चा सौदा करने वाली पार्टियों को भी बीस साला...

  यह राम रहीम की धरती रही है, गुरमितों की नही। इस गुरमीत के कारण राम-रहीम की संस्कृति इतिहास हो रही है। गंगा-यमुनी तहजीब...

फर्जी सवालों और संघर्षों का यह संसार

महत्वाकांक्षा आदमी को आदमी नहीं रहने देती। मकड़ी अपने ही बिने जाल में फंस जाती है और फिर वहीं समाप्त हो जाती है। चेहरे...

किनारे में डूबती नीतीश की राजनीतिक नैया

समाजवादियों का साथ रहना और न रहना, यह कोई मायने नहीं रखता है. समाजवादी ना तो दीर्घकाल तक किसी के साथ रह सकते हैं...

पप्पू यादव के बेजोड़ होने में पप्पू यादव स्वयं बाधक, जरुरत...

  बाबा विजयेन्द्र की कलम से पप्पू यादव का नाम लेते ही जो छवि हम सबके सामने उभरती है वह है बाहुबली, दबंग और रोबिनहुड की....

छुक-छुक रेल चली है मृत्यु का

बाबा विजयेन्द्र   प्रभु इस 'सुरेश' को नैतिकता के स्तर पर तुरत इस्तीफ़ा देने की सदबुद्धि दे. लेकिन हमें पता है कि सद्बुद्धि के बावजूद ये...
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