गुजरात चुनाव और पाकिस्तान का तड़का 

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अखिलेश अखिल 
गुजरात चुनाव की राजनीति पाकिस्तान तक पहुंच रही है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान गुजरात चुनाव में मजा ले रहा है। पिछले 2 दिनों से गुजरात-चुनाव और पाकिस्तान को लेकर राजनीति चल रही है। ऐसे में यह जानना जरुरी है कि क्या वाकई पाकिस्तान का गुजरात-चुनाव से कोई सरोकार है ? सबसे पहले पीएम मोदी ने क्या कहा, इसे देखा जाय। गुजरात के पालमपुर में एक चुनावी-सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पाकिस्तान के एक पूर्व सैन्य कमांडर के ट्वीट का हवाला दिया और कहा कि  ‘पाकिस्तान के एक पूर्व सैन्य महानिदेशक अर्शद रफीक़ ने ट्वीट किया है कि गुजरात का मुख्यमंत्री अहमद पटेल (सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार) को बनना चाहिए।  समझ नहीं आता कि पाकिस्तान के वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अफसर गुजरात चुनाव में दिमाग क्यों लगा रहे हैं? इसी बीच पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल अय्यर के घर पर कांग्रेस के नेताओं से मिलता है।  और अगले दिन वे गुजरात की निचली जातियों (अय्यर की नीच टिप्पणी की तरफ इशारा) का अपमान करते हैं।  क्या ये सभी चीजें सवाल खड़ा नहीं करतीं।  कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए। ’ पीएम मोदी के इस बयान का जबाब तो वाकई में कांग्रेस को देना चाहिए। हो सकता है कि कांग्रेस इसका जबाब देगी भी। लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान के इस मसले पर गुजरात की राजनीति गर्म है।  दूसरे चरण का चुनाव वहाँ 14 दिसंबर को होने हैं और माना जा रहा है कि पाकिस्तान वाली बात को लेकर बीजेपी वहाँ बढ़त बनाती दिख रही है। राहुल गांधी ने पिछले तमाम कोशिशों के बाद गुजरात में जो माहौल खड़ा किया था उसमे बीजेपी और मोदी जी कमजोर करते दिख रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह भी है कि पीएम मोदी ने जो बातें कही है उसमे कोई सच्चाई भी है या फिर केवल राजनीतिक कूटनीति!
          ख़बरों की राजनीतिक चीरफाड़ की जाए तो पता चलता है कि अय्यर के घर पर हुए एक रात्रिभोज को आधार बनाकर प्रधानमंत्री ने जो आरोप लगाया है उसमे एक सच्चाई तो यही है कि इसमें पाकिस्तान के राजनयिक मौजूद थे। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा  है कि अय्यर के घर यह रात्रिभोज छह दिसंबर को आयोजित हुआ था।  पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद अहमद कसूरी के सम्मान में अय्यर ने भोज दिया था। दिल्ली स्थित थिंक-टैंक अनंत सेंटर की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के सिलसिले में कसूरी भारत आए हुए थे।  इस कार्यक्रम का मूल विषय था, ‘भारत-पाकिस्तान संबंधों की मौजूदा स्थिति। ’ यह कार्यक्रम सात दिसंबर को था।
अय्यर के रात्रिभोज में भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) दीपक कपूर, भारत के पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह, पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर (इनके बेटे की शादी भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी की बेटी से हुई है) भी मौजूद थे।  इसके अलावा पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे- टीसीए राघवन, शरत सभरवाल, के शंकर बाजपेयी, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी आमंत्रित अतिथियों में थे।

      अब इसे महज संयोग कहे या दुर्योग कि इस रात्रि-भोज के साथ ही पाकिस्तान के एक पूर्व सैन्य अधिकारी का ट्वीट सामने आता है और गुजरात की राजनीति पाकिस्तान से जुड़ जाती है। लेकिन ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि जब अय्यर के रात्रि भोज कार्यक्रम में देश के कई बड़े लोग ,पूर्व सैन्य अधिकारी और अति विशिष्ठ लोग शामिल थे तो फिर पाकिस्तान से जुडी कूटनीतिक बातें क्या और लोगों के सामने हुयी ? या फिर इसे महज चुनाव की राजनीति से जोड़कर हवा बनाने की कोशिश की गयी ? ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि जब सरकार को इस तरह की जानकारी है तो फिर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की जरूरत है और अय्यर से पूछताछ की जरुरत है। जो अभी तक हमारी सरकार नहीं कर पायी है।

         लगता है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी के लिए काफ़ी मददग़ार साबित हो रहे हैं।  अय्यर ने प्रधानमंत्री के लिए पहले ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल किया और प्रधानमंत्री मोदी ने उस शब्द को तुरंत ‘निचली जाति’ से जोड़कर कांग्रेस को मुश्किल में फंसाने की कोशिश की।  इसके बाद अय्यर को आनन-फानन में कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया।  लेकिन अब फिर प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ अय्यर को ही जरिया बनाया है।
      इस पुरे मामले में अभी कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। अभी तक इस मसले पर कोई शिकायत भी नहीं की गयी है। जाहिर है कि यह सब संयोग बस गुजरात चुनाव में अपना आधार मजबूत करने का एक सियासी समझ है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस को मणिशंकर अय्यर की राजनीति से काफी नुकसान हुआ है और आगे भी होगा। गुजरात चुनाव में कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो एक सबसे बड़ा कारण अय्यर की राजनीति भी होगा।
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