रितेश सिन्हा। पितृपक्ष की समाप्ति के साथ ही महाराष्ट्र के कांग्रेसियों में जबर्दस्त उत्साह का माहौल है। राहुल के अमेरिका दौरे से आने में अभी भी कुछ दिनों का वक्त है, मगर उनके आने से पहले ही मराठा छत्रपों ने मयान से तलवारें बाहर निकाल ली है और दिल्ली दरबार में अशोक चव्हान और मोहन प्रकाश की जोड़ी पर जोरदार तरीके से हमला किया है। ये जोड़ी अब अपना वजूद बचाने में जुट गई है। उनका भरोसा सोनिया के तीन प्रमुख सिपाहसलारों जनार्दन द्विवेदी, अहमद पटेल और मोतीलाल वोरा की तिकड़ी पर नहीं, बल्कि राहुल दरबार के नए छत्रप अलंकार के बूते टिकी हुई है। इसी बीच अशोक चव्हान की घेराबंदी में एक और कांग्रेसी शामिल हो गए। सतीश चतुर्वेदी, नितिन राउत और अनीस अहमद की तिकड़ी के साथ उल्लास पवार का नाम जुड़ गया है। उन्होंने कांग्रेसी आलाकमान को शिकायत करते हुए अशोक चव्हान के कार्यालय से होने वाली ओछी राजनीति पर भी उनका ध्यान आकृष्ट कराया। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय से गणेश पाटिल द्वारा जिला अध्यक्षों को फोन के द्वारा दिए जा रहे दिशा-निर्देश के बारे में बताया कि किस प्रकार से सुनियोजित तरीके से जिला कार्यकारिणी की मीटिंग कर एक लाइन का प्रस्ताव पारित करने का निर्देश दिया जा रहा है। इस निर्देशानुसार इस प्रकार की सिफारिश की जा रही है कि अशोक चव्हान को चुनाव के बदले यह अधिकार दिए जाएं कि वे जिला, शहर और तालुका अध्यक्ष की नियुक्ति का सकें फिर इस प्रस्ताव को कांग्रेस अध्यक्ष, पार्टी उपाध्यक्ष और सोनिया के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को भेजा जाए। मगर षड्यंत्रकारी मंसूबे का पता चलते ही जिला अध्यक्षों ने इस प्रस्ताव को ही नकार दिया। पश्चिमी महाराष्ट्र को छोड़कर बाकीं सभी जिलों में इस प्रस्ताव को नकार दिया गया है और इसकी शिकायत कांग्रेसी आलाकमान तक पहुंचा दी गई है। नागपुर की तिकड़ी चतुर्वेदी, राउत और अनीस ने अशोक चव्हान, मोहन प्रकाश और गणेश पाटिल की तिकड़ी की काट करने के लिए दिल्ली पहुंचे। आलाकमान के अलावा सोनिया के निजी सचिव बी‐ जाॅर्ज, राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री को उनके पूरे क्रियाकलापों की जानकारी पहुंचा दी। इसी बीच महाराष्ट्र कांग्रेस में एक और भूचाल आया हुआ है। कोंकण के दिग्गज नेता नारायण राणे ने भी मोहन प्रकाश और अशोक चव्हान के मनमानी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। बकौल राणे चव्हाण व प्रकाश ने मिलकर सिंधुदुर्ग जिले में जो कुछ भी किया है, उसका अंत मैं नवरात्र उत्सव में ही कर दूंगा। राणे का कहना है कि चव्हाण नहीं चाहते हैं कि मैं कांग्रेस में रहूं। वर्ष 2005 में मैं शिवसेना छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुआ, लेकिन मुझे यहां निराशा हाथ लगी है। मुझे जो आश्वासन दिया गया था उसको पूरा नहीं किया गया। आपको बताते चलूं कि प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने सिंधुदुर्ग जिला कार्यकारिणी को बर्खास्त करके राणे समर्थक जिला अध्यक्ष दत्ता सावंत को हटाते हुए उनकी जगह पर विकास सावंत की नियुक्ति की है। नारायण राणे का यहां तक आरोप है कि अशोक चव्हाण पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। चव्हाण ने जिस प्रकार से नागपुर में जाकर जिले की कांग्रेस को खत्म कर दिया है, ठीक उसी प्रकार उन्होंने पूरे सूबे में इस योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। केवल नांदेड़ की बात करें तो कांग्रेस के 17 नगरसेवक पार्टी छोड़ चुके हैं। कांग्रेस में जिस नेता का जनाधार है, उसको खत्म करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन जो लोग पार्टी को खत्म करने पर आमादा हैं, मैं उनको उनकी जगह दिखा करके दम लूंगा। राणे यहीं नहीं रूके, उनका कहना था कि रत्नागिरी में 4 वर्ष से जिला अध्यक्ष का पद खाली है, लेकिन यहां के बारे में चव्हाण ने कोई फैसला नहीं लिया। यानी कुल मिलाकार सूबे में कांग्रेस की बदहाली का पूरा ठीकरा चव्हान-मोहन पर पड़ने की आशंका बलवती हो गई है।
राणे की बगावती तेवर से पार्टी के अंदर चल रही खेमेबंदी और गुटबाजी बड़े पैमाने में पार्टी से बाहर आ चुकी है। कांग्रेसी नेता खुलेआम प्रदेश अध्यक्ष के ऊपर साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं।
इसके इतर नागपुर के कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी आलाकमान से अशोक चव्हान और मोहन प्रकाश को हटाने के साथ-साथ अलग विदर्भ कांग्रेस के गठन की मांग भी कर रहे हैं। विदर्भ कांग्रेस की मांग पर जिन नेताओं ने खुले तौर पर अपने समर्थन की बात की है उनमें तिकड़ी के अलावा शिवाजी राव मोघे, वसंतपुर के पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष वसंत पुरके, गेव अवारी, अशोक धवढ, प्रफुल्ल गुढके, पूर्व सांसद नरेश पुगलिया, नितिन कुंभलकर और कृष्ण कुमार पांडेय के नाम लिए जा सकते हैं। पार्टी के निष्ठावान और जमीनी कार्यकत्र्ताओं का यहां तक मानना है कि जब प्रदेश अध्यक्ष पुराने कांग्रेसियों के साथ इस प्रकार कर रवैया कर सकते हैं। इन नेताओं का कहना था कि प्रदेश अध्यक्ष के द्वारा नागपुर मनपा के टिकट बेची जा रही थी। कई नेताओं ने स्वीकार किया कि चूंकि मांगी जाने वाली रकम बहुत ज्यादा थी जिसे देने में वे असमर्थ थे, यही वजह है कि चुन-चुन कर ऐसे कांग्रेसी कार्यकत्र्ताओं को हतोत्साहित किया गया। अब सभी को राहुल के विदेश से लौटने का इंतजार है ताकि अशोक-मोहन की जोड़ी को हटाकर महाराष्ट्र को नया सूबेदार और नए प्रभारी दिए जा सकें।
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