रितेश सिन्हा। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हान को एक के बाद एक राजनीतिक और न्यायिक मामलों में मात मिल रही है। अशोक के बुरे दिन उनका साथ नहीं छोड़ रहे और एक वो हैं जो अपनी हरकतों से भी बाज नहीं आ रहे। वसूली की उनकी आदत उनको ले डूबी। अशोक ने ‘माल’ के पीछे अपनी पूरी सियासत तो छोड़िए, अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया। ताजा मामला नागपुर हाईकोर्ट द्वारा नागपुर महानगरपालिका में पहले तो सदन के नेता पद पर कोर्ट ने दो टूक फैसले में अशोक की अस्मिता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए अपना फैसला सुनाया। मगर अध्यक्ष पद के गुरूर में मगरूर अशोक मात खाने के बाद भी फिर से नए विवाद में कूद गए। अपने चंपू विकास ठाकरे के माध्यम से पुनः हाईकोर्ट पहुंच गए। मामला नामित सदस्य का था जिसे सदन में संख्या बल से विभिन्न दलों में प्रतिनिधि नामित किए जाते हैं और सदस्य को नामित करने का अधिकार उस सदन के प्रत्येक राजनीतिक दल के नेता के द्वारा ही किया जाता है। होना क्या था, वहीं हुआ, अशोक से बड़ी चूक हो गई। हाईकोर्ट ने विकास ठाकरे की याचिका खारिज कर नेता सदन द्वारा नामित किए गए रिजकर को ही नामित सदस्य माना। अशोक विरोधी ग्रुप जिसकी अगुवाई नागपुर के नेता सतीश चतुर्वेदी, नितिन राउत और अनीस अहमद कर रहे हैं, उन्होंने अशोक चव्हान, विलास राव मुत्तेवार और अशोक ठाकरे की तिकड़ी को तीसरी बार करारी मात दी।
महानगरपालिका के टिकट बंटवारे में अशोक खुद नागपुर पहुंचे थे। सूबे के प्रभारी मोहन प्रकाश और अशोक की जोड़ी, जिसे राहुल दरबार में अलंकार का समर्थन भी प्राप्त है, केवल आर्थिक व्यवहार की वजह से बचे हुए हैं। वरना उनकी कारगुजारियों के शिकायतों के पुलिंदे से अंबार आम कार्यकत्र्ता भी भली-भांति परिचित हैं। अलंकार की वजह से उनकी शिकायतों के खिलाफ भी कोई कार्रवाही तक नहीं हो पाई है। टिकट बांटने की प्रक्रिया में अशोक चव्हान पर रवि भवन में सड़े हुए अंडे और टमाटर से उनका भव्य स्वागत भी किया गया था जिसे वो अभी तक नहीं भूले हैं। कालिख पोतकर उनका महिमामंडन भी कांग्रेसी कार्यकत्र्ताओं ने किया। मनोनित पार्षद का एकमात्र सीट जो सदन में कांग्रेस पक्ष को मिली थी, उस पर किशोर जिचकार के नाम की घोषणा की गई थी।
अब तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अब विदर्भ के नेताओं ने बगावत का बिगुल भी फूंक दिया है जो केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश में आए चुनाव पदाधिकारी व पूर्व सांसद महेश जोशी से मिलकर अलग विदर्भ प्रदेश की मांग भी कर रहे हैं। इस अलग विदर्भ कांग्रेस की मांग के लिए जो नेता खुलकर सामने आए हैं, उनमें अनीस अहमद, नितिन राउत, शिवाजी राव मोघे, वसंतपुर के पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष वसंत पुरके, गेव अवारी, अशोक धवढ, प्रफुल्ल गुढके, पूर्व सांसद नरेश पुगलिया, नितिन कुंभलकर और कृष्ण कुमार पांडेय शामिल हैं। इस विशेष बैठक में विदर्भ के सभी कांग्रेसी नेता शामिल हुए, मगर विलासराव मुत्तेवार और अशोक के चंपू विकास ठाकरे नदारद रहे। पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी के आवास पर हुई इस बैठक के बारे में पूर्व सांसद नरेश पुगलिया और शिवाजी राव मोघे ने संयुक्त बयान के जरिए कहा कि कांग्रेस को आज विदर्भ में मजबूत करना समय की मांग है। यह पहले भी थी और 84 तक कार्यरत रही। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मशताब्दी के बहाने आयोजित इस बैठक में अलग विदर्भ कांग्रेस के कार्यक्रम की रूपरेखा पर सभी एक सहमत दिखे और इस बाबत एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस फैसले से कांग्रेस आलाकमान को अवगत भी कराएगा। वैसे इस बैठक की चर्चा भले ही मीडिया के गलियारे में न हो, मगर राजनीतिक गलियारे में इसके सियासी मायने भी लगाए जा रहे हैं। बैठक में अशोक हटाओ और महाराष्ट्र बचाओ अभियान का एक हिस्सा था जो हाईकोर्ट के फैसले से अशोक पर विजय का जश्न कहा जात सकता है। इस पूरे इंदिरा जन्मशताब्दी वर्ष में अशोक चव्हान पर राजनीतिक हमले तेज होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता जिसकी शुरूआत सूबे के यावतमल जिले के पुषद प्रखंड से की जाएगी। इसमें विदर्भ के तमाम बड़े कांग्रेसी नेताओं के साथ-साथ केंद्र से भी बड़े नेताओं की उपस्थिति का अनुमान है।
विदर्भ कांग्रेस के गठन को लेकर कांग्रेस आलाकमान भी बेहद गंभीर दिखती है। कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी के उपाध्यक्ष ने भी इसको लेकर अपनी सहमति प्रदान किया है। राहुल के विदेश दौरे से आते ही अलग विदर्भ कांग्रेस के गठन का रास्ता भी साफ होगा और अशोक-मोहन की जोड़ी पर भी गाज गिरने की संभावना है। मुंह पर कालिख पुतवाने वाले अशोक प्रदेश के पहले अध्यक्ष हैं जिनकी नागपुर में इस तरह थू-थू हुई फिर भी मुंह काला किए लड़ाई के लिए आतुर दिखते हैं। उन्हें भली-भांति पता है कि कांग्रेस आलाकमान हटाने का फैसला ले चुका है और केवल पितृ पक्ष की वजह से उन्हें कुछ दिन की मोहलत मिली हुई है। दूसरा अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी इस समय प्रभार ग्रहण नहीं करना चाहता। पितृ पक्ष के अमावश्या को खत्म होने में एक हफ्ते से भी कम का समय बाकी है, विरोधी खेमा उसी इंतजार में है कि कब अंधेरा छटे और अशोक टीम को मात मिले। अशोक चव्हान के बुरे समय को देखते हुए और एक के बाद एक मात के मद्देनजर यह माना जा सकता है कि जल्द ही आदर्श घोटाले मामले में वे सलाखों के पीछे रहकर अपना राजनीतिक वनवास की नई तैयारी भी कर रहे हैं। प्रदेश के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से संबंध रखने वाले अशोक चव्हान अपने जीते जी उस राजनीतिक परिवार को बर्बाद करने वाले नेता के रूप में जाने जाएंगे।
इसी बीच तेजी से बदलते घटनाक्रम के तहत कांग्रेसी सांसद राजीव सातव, जो प्रदेश अध्यक्ष की सबसे सशक्त दावेदार भी हैं, ने किसानों के जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों के मुआवजे को लेकर नागपुर में केंद्र सरकार के एक आला मंत्री से मुलाकात की। उसके बाद सीधे वे सतीश चतुर्वेदी के आवास पर पहुंचे। वहां मौजूद अनीस अहमद और सतीश चतुर्वेदी से बातचीत के बाद उन्होंने भी अलग विदर्भ कांग्रेस पर अपनी सहमति प्रदान की। सातव ने इन प्रदेश के नेताओं को यह भी आश्वासन दिया कि वे पार्टी उपाध्यक्ष के समक्ष अलग विदर्भ के प्रस्ताव को रखेंगे साथ ही प्रदेश में संगठन की समस्याओं से उन्हें अवगत कराएंगे। देखा जाए तो अशोक चव्हान के विरूद्ध खेमेबंदी को देखते हुए यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि अब उनके दिन अंगुलियों में गिने जा सकते हैं।
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