letter issued by CP Joshi, Rahul addressing in Gujrat, In insat from left to right Ashok Choudhry and Hardik patel

रितेश सिन्हा। कांग्रेस के युवराज अपने नए तेवर के साथ पूरे रौ में हैं। एक परिपक्व नेता के तौर पर खुद को स्थापित करने में लगे हैं। विगत छह महीनों में कांग्रेस उपाध्यक्ष अपनी कार्यशैली से न केवल आलोचकों का मुंह बंद करने में कामयाब रहे हैं, बल्कि अपने राजनीतिक विरोधियों को भी नीतियां बदलने पर मजबूर किया है। इन बीते महीनों में उन्होंने एक तजुर्बेकार संगठन के मुखिया के तौर पर अपनी राजनीतिक परिपक्वता दिखाई है। यूपी के विधानसभा चुनावों में अपने सिपाहसलारों की वजह से हुई राजनीतिक हार से सबक सीखते हुए उन्होंने एआईसीसी में वर्षों से कब्जा किए हुए मठाधीशों से जिम्मेवारी छीनकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। वैसे खुद को दिग्गज समझने वाले ऐसे राजनेताओं की लंबी फेहरिस्त है। खुद को राहुल का सिपाहसलार बताने वाले दिग्विजय सिंह का सबसे बुरा हाल रहा। उसके बाद मोहन प्रकाश, वीके हरिप्रसाद जैसे महासचिवों के पर कतरे गए। देखा जाए तो कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को छोड़ दें, तो अधिकांश पुराने नेताओं को अपनी मठाधीशी का परिणाम भुगतना पड़ा और संगठन से वे या तो दरकिनार कर दिए गए हैं, या फिर उनकी भूमिका सिमट चुकी है। एक और महासचिव सीपी जोशी ने तो राई का पहाड़ ही बना दिया। मामूली हैसियत वाले अशोक चौधरी को जोशी का साथ मिला और उन्होंने तो कांग्रेस हाईकमान को चुनौती दे डाली। जब अशोक ने ताल ठोककर केंद्रीय नेतृत्व के बहाने सोनिया और राहुल को एक तरह से निशाने पर लिया तब भी जोशी खामोश रहे। उस समय राहुल विदेश में थे और सोनिया बीमार। जब राहुल विदेश से लौटे तभी साफ हो गया था कि अशोक का संगठन से जाना तय है। आते ही गुजरात दौरे पर गए राहुल के निर्देश पर अशोक चौधरी नप गए, मगर सीपी जोशी बिहार के पूरे घटनाक्रम से पल्ला नहीं झाड़ सकते।
महागठबंधन से लेकर नए गठबंधन तक की सरकार के दौरान जहां देश की मीडिया नीतीश-अशोक के गठजोड़ की महिमामंडन करने में जुटी हुई थी, वहीं हमने अपने लेख के माध्यम से अशोक की कारगुजारियों से न केवल पर्दा उठाया, बल्कि नीतीश की राजनीतिक मजबूरी का भी उल्लेख किया। अब इसे उन खबरों का असर भी कह सकते हैं, जिस पर कांग्रेस आलाकमान ने भी मोहर लगा दी। खबर का असर हुआ कि अशोक चौधरी से अध्यक्ष का पद छीन लिया गया है और कांग्रेस नीतीश से भी दूरी बनाते हुए रणनीति में जुट गई है। जिस तरीके से गुजरात में राहुल गांधी ने अपने चुनावी अभियान की शुरूआत की है, उससे आने वाले समय में भाजपा के इस गढ़ में कांग्रेस एक बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है। राहुल ने भाजपा को मार्केटिंग का मास्टर बताकर एक राजनीतिक तीर छोड़ दिया है। बकौल राहुल हमने कई अच्छे काम किए, मगर अपनी मार्केटिंग ठीक तरीके से नहीं कर पाए और मार खा गए। भाजपा मार्केटिंग में अच्छी है मगर मार्केटिंग करना हमारे डीएनए में नहीं। उन्होंने विदेश मंत्री के हालिया बयान को भी कांग्रेस के कामों के मार्केटिंग से जोड़ दिया।
मगर इस दौरे की सबसे बड़ी राजनीतिक चाल चलते हुए पाटीदार समाज को साथ लेकर चलने की बात कही गई। इससे भी राजनीतिक पारा गर्म होने के आसार हैं। गौरतलब है कि पाटीदार समाज को अपने पाले में करना आज भी भाजपा के शीर्ष नेताओं की नींदे उड़ाई हुई है। राहुल के बयान पर जरा नजर डालिए उन्होंने कहा कि मैं पाटीदार समाज से कहना चाहता हूं कि भाजपा के लोगों ने आप पर गोलियां चलाई, इसे कांग्रेस अपना तरीका नहीं मानती। हम प्यार और भाईचारे से काम करते हैं। राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात की सरकार, गुजरात की जनता चलाएगी। वो दिल्ली के रिमोट कंट्रोल से नहीं चलेगी। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भाजपा अक्सर सोनिया और राहुल पर आरोप लगाती थी कि रिमोट से चलने वाली सरकार है। अब राहुल ने उसी अंदाज में भाजपा को आड़े हाथों लिया।
विदेशी दौरों में राहुल ने जिस प्रकार युवाओं और छात्रों के बीच अपनी बातों को तार्किक अंदाज में पेश किया, उससे भी भाजपा खेमे में बेचैनी देखी जा सकती है। देखा जाए तो जब एक तरफ समूचा विपक्ष धाराशाही हो चुका है, छोटे और क्षेत्रीय दल भाजपा के रणनीतिक पार्टनर बनते जा रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस की एकला चलो की नीति ने भाजपा को भी अपनी नीतियों को बदलने पर मजबूर किया है। भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने राहुल के विदेश यात्रा के दौरान दिए गए भाषण को आड़े हाथों लिया। पहले इस प्रकार की स्थिति नहीं थी। कल तक राहुल को पप्पू कहने वाली वहीं भाजपा अब उनके हर बयानों पर नजर रख रही है। देशी-विदेशी मीडिया में राहुल की बढ़ती लोकप्रियता भी भाजपा आलाकमान की चिंता का सबब है। दिल्ली में चलने वाली भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बैठक में इसकी झलक दिखाई दी। भाजपा अध्यक्ष का वंशवाद वाले बयान पर राहुल के बयान की आलोचना इसी घबराहट और गंभीरता को प्रदर्शित करता है। देखा जाए तो आज हर राजनीतिक दल वंशवाद से प्रभावित है। कांग्रेस की तो छोड़िए भाजपा में वर्तमान में कई केंद्रीय मंत्री भी ऐसे हैं जिनको राजनीति विरासत में मिली और बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के वे आज सत्ता का सुख भोग रहे हैं। कई राज्यों में नेता-पुत्र या नेता-पुत्री को ही आगे बढ़ने का अवसर मिला।
गुजरात में जिस तरह से कांग्रेस उपाध्यक्ष ने एक नई राजनीतिक समीकरण की शुरूआत की है, वे आने वाले चुनावों की नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। विदेश से लौटते ही राहुल ने राजनीतिक परिपक्वता दिखाई। जिस तरह से पाटीदार समाज के युवा नेता हार्दिक पटेल के साथ हाथ मिलाया, वहीं अशोक चौधरी को बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से तत्काल प्रभाव से हटाकर अपना संदेश दे दिया है।
राहुल और उनकी टीम बिहार में एक जमीनी नेता की तलाश में है जो हार्दिक पटेल सरीखा कोई बड़ा आंदोलन की जमीन पुख्ता करे और कांग्रेस को नई ऊंचाइयों पर ले जा सके। अशोक को पद से हटाकर राहुल ने एक और संदेश दे दिया है कि वे दिल्ली में जमे हुए हवा-हवाई नेताओं की बजाए जमीन पर काम करने वाले पुराने कांग्रेसी की तलाश में हैं। अशोक को हटाने के बाद नए अध्यक्ष की नियुक्ति में हुए विलंब का राजनीतिक विश्लेषण करें तो पाते हैं कि कांग्रेस उपाध्यक्ष बिहार के किसी प्रवासी नेताओं में से किसी को भी कमान नहीं सौंपने जा रहे हैं। अशोक के हटने से एक और बात साफ हो गई कि कांग्रेस उन्हें पार्टी से निकालकर न तो शहीद का दर्जा देना चाहती है और न ही उन्हें साथ लेकर चलना चाहती। पिछले लगभग दो सालों से निष्क्रिय बने सूबे के प्रभारी महासचिव अब भी चमत्कार की आशा में हैं। जिसका सीपी अध्यक्ष बनाना चाहते थे, उसी के चहेते को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक तरह से मानो पल्ला झाड़ लिया है। लेकिन उनकी यह सियासत बिहार के मुस्लिम नेताओं को नागवार गुजर रहा है। औरंगाबाद के इस युवा नेता को भले ही तत्कालीन कार्यभार दिया गया है, मगर ऐसा करके प्रभारी महासचिव ने सूबे के कई बड़े नेताओं की नाराजगी भी मोल ली है जिसका खामियाजा उन्हें आने वाले समय में चुकाना पड़ सकता है। अशोक को हटाने के साथ पार्टी आलाकमान ने प्रदेश के सभी कमिटियों को भंग कर दिया है। अब देखना है कि जिस तरह संगठन और संगठन से बाहर राहुल ने अपनी नई सोच को दर्शाया है, उसके परिणाम कांग्रेस को आगे बढ़ाने में किस प्रकार मददगार साबित होती हैं।
your feedback on riteshkrishnasinha@gmail.com or you may contact on 9810941667 regarding this story.

loading...
loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here