अखिलेश अखिल की कलम से …
दलाल और चोर कथित पत्रकारों ने नाक कटा दी। नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली कहावत चरितार्थ हो गयी। लन्दन में जिन महान पत्रकारोबन ने चांदी की चमच्च चुराई वे कोई मामूली नहीं थे। उनके नाम बड़े अदब से लोग लेते हैं और सत्ता -विपक्ष में उनकी धाक के क्या  कहने ! प्रशासन के लोग तो उन्हें दूर से ही सलाम करते हैं। जिस बैनर पर वे काम करते हैं उस बैनर का भी सरोकार कोई कम नहीं। चमच्च चुराने वाले लोग बड़े बैनर के बड़े पत्रकार थे।

चम्मच चुराने वाले का नाम देना भी जरूरी है। इनमे एक हैं दैनिक आजकल के पत्रकार दीपांकर नंदी और दूसरे हैं प्रतिष्ठत आनंन्द बाजार पत्रिका के देव वास भटटाचार्य। इन लोगों ने पत्रकारिता को तो कलंकित किया ही बैनर को भी बदनाम कर दिया। ममता सरकार की इज्जत गयी अलग से।
खबर है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ आधिकारिक दौरे पर लंदन में साथ गए वरिष्ठ पत्रकारों पर चांदी का सामान चुराने का आरोप लगा है। यहां जब लग्जरी होटल में मेहमानों के लिए डिनर का आयोजन किया गया तो चोरी का  मामला सामने आया। होटल के सुरक्षा अधिकारी चमच्च चुराते पत्रकारों को देख हतप्रभ हो गए। शरमाये भी गुस्साए भी। हैरत में पड़े सुरक्षा अधिकारी ने जब वीवीआईपी मेहमानो को चोरी करते देखा तो उनके मुँह से सच बात निकल ही नहीं रही  थी। उन्होंने सीसीटीवी में देखा कि कुछ लोग चांदी के चम्मच चुराकर पर्स और बैग में डाल रहे थे। जब उन्होंने पता लगाया कि यह लोग कौन है तो अधिकारी हैरान रह गए। ये लोग ममता के साथ गए वरिष्ठ पत्रकार और संपादक थे।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे पहले टेबल से जिस शख्स ने चम्मच चुराया वह बंगाल के सम्मानित समाचार पत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार थे। एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार ने भी वहीं हरकत की। वह अन्य समाचार प्रकाशन के संपादक हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री के अधिकतर विदेशी दौरों पर साथ रहने वाले एक पत्रकार ने दी। बंगाली पत्रकार ने बताया जब पत्रकार चोरी कर रहे थे तो उनको लगा कि उनके आसपास लगे कैमरे काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि बंगाल में अक्सर ऐसा होता है कि सीसीटीवी कैमरे काम नहीं करते। यहां उससे उलट हुआ, यहां सारे कैमरे काम भी कर रहे थे और सुरक्षा अधिकारी उन पर नजर भी बनाए हुए थे। सुरक्षा अधिकारियों की नजर में ही सबसे पहले ये हरकत आई।
उन्होंने देखा कि कुछ लोग होटल के सामान की चोरी कर बैग में डाल रहे हैं। जब उनसे पूछताछ हुई तो उन्होंने पहले कहा कि उन्होंने कुछ नहीं लिया है पर जब उनको सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई तो सच्चाई सामने आई। होटल के सुरक्षा दस्ते ने सहयोग न करने पर पूरे मामलों को सार्वजनिक करने की धमकी भी दी। इसपर आरोपी ने चोरी की बात को स्वीकारा। इसके बाद उन्हें 50 पौंड का जुर्माना भरना पड़ा। वे कैमरे में चांदी का सामान अपने बैग में डालते दिखे। अभी तक ममता सरकार की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
चोर पत्रकारों  ने हमारी इज्जत को नीलाम किया है। भारत को बदनाम किया है। ऐसे लोगों पर सरकार और मीडिया संस्थान क्या कार्रवाई करेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन सबसे पहले इस पर कार्रवाई प्रेस कौंसिल को करना चाहिए। हालांकि इस तरह की घटना कोई नयी नहीं है। देश के तमाम बड़े शहरों में इस तरह की घटना घटती रही है। इस दिल्ली में ही दर्जनों कथित पत्रकार होटलों में चमच्च और कई और सामान चोरी करते पकड़े गए हैं।
दरअसल ,बाजारवादी समाज में मीडिया के अधिकतर  लोग भी भोगवादी हो गए हैं। ऊपर से वे पत्रकारिता करते दीखते हैं जरूर हैं लेकिन उनके मन में बेईमानी ,दगाबाजी और लोभ लालच का वास होता है। वे लिखते -पढ़ते है सिर्फ अपने लाभ के लिए। पत्रकारिता तो महज उनका आधार भर हैं। बैनर का लाभ वे उठाते हैं। दिल्ली में चोर और दलाल पत्रकारों का संसार सबसे ज्यादा है। इसके अलावे देश के अधिकतर राज्यों में दलाल और सुविधा भोगी  पत्रकार पत्रकारिता के नाम पर खेल करते आ रहे हैं।  देश में तो कई राज्य ऐसे हैं जहां से कभी कोई बेकिंग खबरे नहीं आती।  कई राज्य ऐसे हैं जहां मंत्री से लेकर संत्री तक पत्रकारों को मासिक आधार पर भुगतान करते हैं। कई राज्यों में तो सरकार ही पत्रकार और मीडिया को जीवित किये हुए है। पत्रकारिता से दगाबाजी लोकतंत्र के साथ दगाबाजी के सामान है। बड़े स्तर पर पत्रकारिता को बदलने की जरुरत दिख रही है।

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