अखिलेश अखिल की कलम से 

पिछले लगभग चार साल से मोदी सरकार दुनिया भर की सारी बातें जरूर करती है लेकिन बेरोजगारी का मुद्दा उनके जेहन में कहीं नहीं है। होगा भी तो कोई बस नहीं चल रहा है। सरकार में शामिल सभी नेता रूपी मंत्री और उनके अधिकारी रोजगार पर कुछ बोलते ही नहीं। उनकी जुबान खुलती है दूसरे मसलों पर। ऐसे मसले जिनसे युवाओं का कोई लेना-देना नहीं। जब कोई सवाल करता है तो उसे देश द्रोही और सरकार विरोधी बता दिया जाता है। चांद से मंगल पर जाने की बातें खूब होती है। गंगा से लेकर तमाम नदियों की सफाई पर हिंदुत्व का तमगा लगाकर नेता लोग खूब बोलते हैं लेकिन रोजगार कहां है इसपर उनकी बकैती बंद ही रहती है। पहले हम सब एक ही भारत में रहते थे। भारत हमारी माता है और भारतीय हमारा संस्कार भी। गरीबी हो या अमीरी हम सब भारतीय होने का दंभ आदि काल से भरते रहे हैं। हमें मजा भी आता रहा है। इधर कुछ सालों में यहां कई भारत पैदा हो गया। मसलन-डिजिटल भारत, स्टैंड अप भारत, स्टैंड इन भारत, मेकिंग भारत, स्मार्ट भारत, हिन्दू भारत, धर्मनिरपेक्ष भारत, वर्ल्ड क्लास भारत, साफ भारत, गंदा भारत, भ्रष्ट भारत, ईमानदार भारत, ठग भारत, दलाल भारत, आदि-आदि। बेरोजगार भारत की कहीं चर्चा नहीं। सरकार अपनी नीतियों से भारत को आगे बढ़ाने के लिए जो भी करे, जनता को इससे कोई परहेज नहीं। लेकिन रोजगार तो मिलनी चाहिए। बेरोजगार आदमी को आखिर कितना ठगा जाएगा। जब काम ही नहीं है तो दाम कहां से मिलेगा। जब दाम नहीं है तो कोई भी भारत किसी को सुहाता नहीं। ‘टका का पता नहीं ,कथा रात भर’। बिहार में यह कहावत खूब चलन में है। मोदी सरकार इस कहावत को चरितार्थ करती जा रही है। इस सरकार का मूल मकसद केवल चुनाव जीतना भर रह गया है। सवाल तो यह भी है कि जिन-जिन राज्यों में इनकी सरकार बनी क्या वहां बेरोजगारी नहीं है। क्या वहां के युवा परेशान नहीं है। लेकिन इस सवाल से इस सरकार को कोई लेना-देना नहीं।
बेरोजगारी इस समय देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। क्योंकि भारत में विश्व के अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक युवा वर्ग हैं। लेकिन यहां रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं। सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के मुताबिक देश में 2017 में केवल 0.5% नौकरियां बढ़ी हैं।
इतनी बुरी स्तिथि तब है जब देश में भाजपा की सरकार है। गौरतलब है कि 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने प्रतिवर्ष 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। शहरी क्षेत्रों में 2% नौकरियों में इजाफा हुआ है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरियां बढ़ने के बजाए 0.3% घटी हैं। कृषि क्षेत्र में आया संकट भी इसकी बड़ी वजह है। बता दें, कि हाल में सेंट्रल स्टैटिस्टिकल आॅफिस (सीएसआई) ने देश की विकास दर के आकड़े बताते हुए कहा था कि कृषि क्षेत्र की विकास दर 2017-18 में 2.1% रहेगी जो की 2016-17 में 4.5% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में ये हाल तब है जब देश के 64% श्रमिक वहां काम करते हैं।
नोटबंदी और जीएसटी के कारण लोगों ने बड़ी संख्या में नौकरियां गंवाई हैं। सरकारी आकड़ों के मुताबिक भी लगभग 15 लाख लोगों ने नौकरियां गंवाई हैं। इसमें से 40% शहरी क्षेत्रों में और अन्य ग्रामीण में। बाजार में मांग की कमी भी इसका कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद बाजार में मांग की भारी गिरावट देखी गई है। हाल ही में सीएमआईई ने बताया था कि 2017 में देश में नया निवेश 13 सालों में सबसे कम रहा है। मांग की कमी के कारण उद्योगपति या कम्पनियां निवेश नहीं कर रही हैं। निवेश ना होने के कारण बाजार में रोजगार का संकट है।
माना कि पिछली सरकार ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। पिछली सरकार महा भ्रष्ट थी, देश को बेच दिया। अब तो चार साल से आपकी सरकार है। देश का युवा केवल एक ही सवाल कर रहा है कि रोजगार कहां है? बाकी सारी योजनाएं सरकार चलाती दिख रही है लेकिन रोजगार का अकाल खत्म ही नहीं होता। लगता है बज्जर पर गया है। मोदी सरकार को समय रहते इस पर ध्यान देने की जरूरत है। बेरोजगारी का सवाल सबसे अहम सवाल है। इससे मुंह नहीं छुपाया जा सकता। सबसे ज्यादा परेशान देश के शिक्षित युवा हैं।

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